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[संगीत] हाय दोस्तों, कैसे हो आप सभी? वेलकम बैक टू द चैनल। आज मैं आपको ले जाने वाला हूं द पिंक सिटी। जयपुर की ट्रिप पर। जयपुर को राजस्थान का दिल माना जाता है जो मेरे दिल के बेहद करीब है। यकीन मानिए यह तीन दिन की ट्रिप आपकी जिंदगी के सबसे यादगार पलों में से एक होने वाली है। जयपुर इस शहर का नाम सुनते ही आंखों के सामने सबसे पहले क्या आता है? हवा महल जी हां। लेकिन इसके अलावा जयपुर में ऊंचे-ऊंचे किले, जयपुर के बाजार, मुंह में पानी ला देने वाला लजीज खाना और हवा में घुला हुआ इतिहास। इसे पिंक सिटी ऐसे ही नहीं कहते हैं। यह नाम जयपुर पर बिल्कुल फिट बैठता है। मैंने अभी हाल ही में यहां पर बेहतरीन तीन दिन बिताए हैं। और सच कहूं तो मैं पूरी तरह से इस शहर के प्यार में गिर चुका हूं। जयपुर को राजा सवाई जय सिंह जी के द्वारा 17th सेंचुरी में बसाया गया था। जयपुर वर्ल्ड फेमस है यहां के पैलेसेस के लिए। यहां के हेरिटेज फोर्ट्स के लिए। ब्यूटीफुल गार्डंस, म्यूजियम, यहां की शानदार टूरिस्ट प्लेसेस, हिस्टोरिकल टेंपल्स, ट्रेडिशनल कल्चर और साथ ही यहां के लाजवाब फूड के लिए। तो अपनी कुर्सी की पेटी बांध लीजिए क्योंकि मैं अपना जयपुर का पूरा एक्सपीरियंस, मैं कहां रुका, कैसे घूमा, क्या-क्या देखा, सब कुछ ए टू जेड आपके साथ शेयर करने वाला हूं। तो, यह टूर गाइड वीडियो आपको अपनी खुद की जयपुर की ट्रिप प्लान करने में हेल्प करेगी। जैसे आप जयपुर में कौन-कौन से प्लेसेस पर घूमने जा सकते हैं, कहां पर स्टे कर सकते हैं? ऐसी जयपुर की कंप्लीट इंफॉर्मेशन इस वीडियो में आपको मिलने वाली है। सबसे पहले हम बात कर लेते हैं जयपुर कैसे पहुंचे। अगर आपको मेरी तरह ट्रेन का सफर पसंद है, तो जयपुर में आने के लिए आप बाय ट्रेन डायरेक्टली जयपुर जंक्शन तक आ सकते हैं। जयपुर जंक्शन एक बहुत बड़ा स्टेशन है। देश के कोने-कोने से ट्रेन यहां तक आती है। ट्रेन के अलावा आप फ्लाइट से और बस के थ्रू भी जयपुर में आसानी से आ सकते हैं। अगर आप जयपुर में फ्लाइट लेकर आना चाहते हैं तो यहां पर इंटरनेशनल एयरपोर्ट है। जहां पर आप इजीली पहुंच सकते हैं। जयपुर पहुंचने के बाद यहां पर स्टे करने के लिए सिंधी कैंप बस स्टैंड के आसपास में आपको बेस्ट होटल रूम मिल जाएंगे। अगर आप जयपुर में लग्जरियस एक्सपीरियंस लेना चाहते हैं तो चौकी ढाणी रिसोर्ट में स्टे ले सकते हैं। नहीं तो आप हेरिटेज होटल में रुकना चाहते हैं तो जल महल के पास आपको बेस्ट फाइव स्टार हेरिटेज होटल्स मिल जाएंगे। जहां पर आप राजा महाराजाओं के जैसा लग्जरियस एक्सपीरियंस ले सकते हैं। या आप चाहो तो बजट फ्रेंडली होटल हवा महल के आसपास में भी ले सकते हैं। दिन भर घूमने के बाद रात में आराम करने के लिए जयपुर में होटल्स की कोई कमी नहीं है। तो आपको यहां पर अपने बजट के अकॉर्डिंग ₹1500 से ₹2000 की रेंज में होटल रूम मिल जाएंगे। और अगर आप पूरी तरह से शाही अंदाज में रहना चाहते हैं तो जयपुर में रामबाग पैलेस या ओबेरोई राजविलास जैसे वर्ल्ड फेमस लग्जुरियस पैलेसेस होटल्स हैं। यह पहले राजा महाराजाओं के महल हुआ करते थे। बड़े-बड़े कमरे, शानदार बगीचे, टॉप क्लास सर्विस। यह एक्सपीरियंस आप यहां भूल नहीं पाएंगे। पर इनका बजट भी कुछ कम नहीं है। 25,000 पर नाइट से भी ज्यादा इनका रेंट होता है। ऑलराइट। अब हम बात करें गुलाबी शहर में घूमने फिरने की। तो जयपुर की सभी टूरिस्ट प्लेसेस घूमने के लिए आपके पास तीन ऑप्शन है। फर्स्ट आप ऑटो रिक्शा में घूम सकते हैं जिसमें आप जयपुर में कहीं पर भी जाएं ₹20 पर पर्सन के चार्जेस लगते हैं। डिस्टेंस के अकॉर्डिंग ज्यादा भी लग सकते हैं। लेकिन आप रिक्शा में बैठने से पहले एक बार चार्जेस के बारे में बात कर लेना। सेकंड आप टैक्सी बुक करके और बाइक स्कूटी रेंट पर लेकर घूम सकते हैं। जयपुर में रॉयल ब्रदर्स, रent व्हील, जॉय राइड जैसी रेंटल कंपनीज़ है। जहां पर रेंटल चार्जेस भी काफी रीज़नेबल है। बस आप अपना ड्राइविंग लाइसेंस साथ रखना और रेंटल एग्रीमेंट ध्यान से पढ़ लेना। यहां पर बाइक स्कूटी के चार्जेस पर डे के अकॉर्डिंग ₹400 से ₹500 तक लगते हैं। और घूमने के लिए यही एक बेस्ट ऑप्शन रहता है। लेकिन सच बताऊं तो मेरा पर्सनल फेवरेट घूमने का तरीका है टू व्हीलर पर घूमना। इसमें बेनिफिट यह होता है कि हम ट्रैफिक से बच सकते हैं। पतली संकरी गलियों से शॉर्टकट ले सकते हैं और जहां मर्जी चाहे रुक सकते हैं। खैर मेरी तो पर्सनल बाइक है तो पूरा जयपुर मैंने अपनी बाइक से एक्सप्लोर किया है। बाइक, स्कूटी, रेंटल और होटल की डिटेल्स आपको वीडियो के डिस्क्रिप्शन में मिल जाएगी। वीडियो के एंड में आप जाकर चेक कर सकते हैं। जयपुर में आप पहले दिन की शुरुआत हवा महल से कर सकते हैं। लेकिन आज हम सीधे जयपुर के शानदार इतिहास में छलांग लगा रहे हैं। तैयार हो जाइए आलीशान किलों और पुराने जमाने के अजूबों को देखने के लिए। सबसे पहले हम घूमने जाएंगे आमेर पैलेस। जयपुर सिटी से 10 कि.मी. की दूरी पर अरावली पर्वत से घिरा हुआ आमेर का किला मौजूद है। इस किले की नींव मिर्जा राजा मानसिंह प्रथम के द्वारा 1589 में रखी गई थी। राजा मानसिंह जी मुगल बादशाह अकबर के दरबार में सेनापति के स्थान पर थे और इस आमेर किले के अंदर राज परिवार के लोग रहा करते थे। इस किले की सुरक्षा के लिए 12 कि.मी. की दीवार के साथ ही जयगढ़ किले का निर्माण भी किया गया था और इस आमेर के किले से जयगढ़ किले तक जाने के लिए जमीन के अंदर से 2 किलोमीटर की गुप्त सुरंग भी बनी हुई है। आमेर किले को देखे बगैर जयपुर की यात्रा आपकी अधूरी रह सकती है। आमेर किले तक आने के लिए आप पैदल चलकर या अपने निजी वाहन के द्वारा सीधा किले के प्रवेश द्वार तक आ सकते हैं। और इसके अलावा आप चाहे तो हाथी की सवारी करते हुए भी ऊपर आ सकते हैं। लेकिन हाथी की सवारी करने के लिए आपको ₹3,500 की टिकट लेनी होती है। इसके अलावा आप चलकर या फिर यहां पर मिलने वाली जीप से भी आमेर किले तक पहुंच सकते हैं। आमेर किले के अंदर आते ही हम इस किले के अंदर बने चार कोटयार्ड में से सबसे पहले आंगन में पहुंच जाते हैं। जिसे जलेब चौक कहा जाता है। इस जलेब चौक में एंट्री करने के लिए दो मुख्य गेट बने हुए हैं। जिसमें से एक है सूरज पोल और दूसरा है चांद पोल। यह प्रवेश द्वार सूरज पोल है और इसी दिशा से सूरज की पहली किरण इस द्वार पर पड़ती है। इसीलिए इस द्वार को सूरज पोल नाम दिया गया था और उस जमाने में राजा महाराजा इसी द्वार से हाथी की सवारी करते हुए अंदर आते थे और आज भी सुबह 8:00 बजे से लेकर 11:00 बजे तक हाथी की सवारी इसी द्वार से अंदर आती है और इस द्वार का नाम है चांद पोल यानी चांद इसी दिशा से निकलता हुआ दिखाई देता है। यह द्वार आम जनता के आने जाने के लिए था। ऊपर दूसरे आंगन में जाने के लिए आपको यहां पर यह वाला प्रवेश द्वार नजर आएगा और इसका नाम है लायन गेट यानी सिंह पोल और इसी लायन गेट से प्रवेश करते हुए हम इस किले के दूसरे कोटयार्ड यानी कि दूसरे आंगन में पहुंच जाते हैं। अंदर की तरफ आते ही संगमरमर और लाल बलुआ पत्थर से बनी हुई यह 48 स्तंभ की दीवान-ए-आम की इमारत हमें नजर आती है। दीवान-ए-आम यानी कि उस जमाने का कोर्ट रूम। इस जगह पर जनता दरबार लगाया जाता था। इस इमारत के बीच में राजा और उनके मंत्री बैठा करते थे। दीवान-ए-आम के साइड में यह गणेश पोल द्वार बना हुआ है जो कि राजाओं का निजी प्रवेश द्वार हुआ करता था और इस द्वार पर भगवान गणेश जी की पेंटिंग के साथ ही 400 साल पुरानी बहुत ही खूबसूरत नकाशीदार पेंटिंग्स बनी हुई है। दीवाने-ए-आम के पास में ही यह 27 कचहरी बनी हुई है। 27 कचहरी यानी कि उस जमाने का रिकॉर्ड रूम। महाराजा के अधीन उस जमाने में 27 जहांगीर यानी कि 27 रजवाड़े हुआ करते थे। और उन 27 रजवाड़ों का लेखाजोखा इसी जगह पर किया जाता था। कचहरी के सामने आपको आमेर किले का यह बहुत ही ब्यूटीफुल व्यू नजर आता है। और सामने आप यह जो देख रहे हैं, यह सैफरॉन गार्डन है जिसे केसर बाग कहा जाता है। राजा मानसिंह जी ने 16वीं शताब्दी में केसर की खेती करने की कोशिश की थी। इस गार्डन के आसपास इस खूबसूरत मावड़ा झील का भी निर्माण किया गया था। लेकिन इस जगह पर गर्मी ज्यादा होने के कारण राजा केसर की खेती करने में नाकामयाब हुए थे। गणेश पोल द्वार से अंदर आते ही हम इस किले के तीसरे आंगन में पहुंच जाते हैं और यहां पर यह शीश महल बना हुआ है जिसे दीवान खास कहा जाता है। इस शीश महल को मिर् राजा जय सिंह जी के द्वारा बनवाया गया था और इस जगह पर राज परिवार और राजा के मंत्रियों को ही आने की अनुमति थी और इस जगह पर जितने भी आपको पिलर्स नजर आएंगे, यह सारे इटालियन मार्बल से बने हुए हैं। और इस शीश महल के अंदर आपको जितने भी शीशे नजर आ रहे हैं, यह राजा ने बेल्जियम कंट्री से मंगवाकर यहां पर लगवाए थे। और इस शीश महल के दोनों तरफ रानियों के दो कमरे बने हुए हैं। शीश महल के सामने यह सुख मंदिर निवास बना हुआ है। इस जगह को राज परिवार के लोग रहने के लिए गर्मियों के समय में प्रयोग करते थे। और इस सुख मंदिर को सफेद संगमरमर और नीले नक्काशीदार मुगल आर्किटेक्चर स्टाइल में बनाया गया था। अभी हम आ चुके हैं आमेर किले के चौथे आंगन में। और इस वाले हिस्से में राजा मानसिंह जी रहा करते थे। और राजा मानसिंह जी की 12 रानियां हुआ करती थी। और इस जगह पर 12 रानियों के लिए एक ही डिज़ाइन के अलग-अलग कमरे बने हुए हैं। आमेर पैलेस को विजिट करने के बाद आप चाहे तो डायरेक्ट जयगढ़ फोर्ट तक जा सकते हैं। लेकिन आपको 2 कि.मी. पैदल चलकर जाना होता है। यदि आप पैदल नहीं आना चाहते हैं तो दूसरी साइड वाले मेन प्रवेश द्वार से जयगढ़ फोर्ट तक पहुंच सकते हैं। जयपुर में हम खाने-पीने की बात करें तो लंच के लिए हम राजस्थान की फेमस डिश खाने के लिए आ गए हैं जो है राजस्थान थाली। यहां पर सबसे पहले हमें राजस्थानी ट्रेडिशनल तरीके से पगड़ी पहनाई जाती है। फिर हमें थाली परोसी जाती है। यहां के मेन्यू में राजस्थानी थाली के दो टाइप्स हैं जो कि प्राइस के अकॉर्डिंग है। इस थाली में बाटी, मसाला बाटी, दाल, केर, सांगरी की सब्जी, गोभी की सब्जी, गट्टे की सब्जी, कड़ी चावल, बाजरे की राबड़ी, लहसुन की चटनी, छाछ, मिर्ची के टरपोले और बाजरे की रोटी होती है। पर पर्सन इस थाली के चार्जेस ₹525 है और थाली अनलिमिटेड रहती है। आप चाहे तो यहां पर आकर आराम से लंच कर सकते हैं। जयगढ़ किला जिसे विक्टरी फोर्ट भी कहते हैं। इसे 1726 में महाराजा जयसिंह सेकंड ने बनवाया था और इस किले का मेन काम था आमेर किले की हिफाजत करना और यहां से आपको आमेर किले का शानदार व्यू देखने को मिलेगा। आमेर किले की सुरक्षा के लिए जयगढ़ किले के ऊपर दुनिया की सबसे बड़ी जैवान तोप भी बनाई गई थी। इस तोप का वजन 250 टन है और इसे सिर्फ एक बार ही चलाया गया था वो भी टेस्ट फायर के दौरान और इसका गोला 35 कि.मी. दूर जाकर गिरा था और जिन सैनिकों ने इस तोप को चलाया था उनके कान के पर्दे फट चुके थे। जयवाण तोप की साइज देखकर ही होश उड़ जाते हैं। जयगढ़ किले के अंदर आर्मरी म्यूजियम भी बना हुआ है। इसे भी आप विजिट कर सकते हैं। जयगढ़ फोर्ट काफी बड़ा है। तो आपको इसे पूरा एक्सप्लोर करने में करीब 3 से 4 घंटे का टाइम लग सकता है। आमेर पैलेस से 1 कि.मी. की दूरी पर यह पन्नामीना कुंड बना हुआ है। आमेर किले से पैदल चलकर भी आप यहां तक पहुंच सकते हैं। यह एक पुरानी बावड़ी है जो कि एक स्टेपवेल है। इस बावड़ी को करीब 16वीं सेंचुरी में पन्ना मीणा नाम की एक महिला ने बनवाया था। राजस्थान में पानी की अहमियत बहुत ज्यादा है। तो उसी को देखते हुए पहले के जमाने में पानी का संरक्षण करने के लिए ऐसी बावड़ियां बनवाई जाती थी। यहां की कोई एंट्री फी नहीं है। यहां पर आप बिल्कुल फ्री में आ सकते हैं। और इस बावड़ी पर कई फिल्मों और वेब सीरीज की शूटिंग भी हो चुकी है। तो यहां पर भी आप आ सकते हैं। अब हम आ गए हैं पन्ना मीणा बावड़ी से चलकर 1 कि.मी. की दूरी पर बने जगत शिरोमणि मंदिर में। आमेर किले के पास में ही यह भव्य और खूबसूरत शिरोमणि मंदिर बना हुआ है जिसे मीराबाई मंदिर भी कहते हैं। इस मंदिर के अंदर कृष्ण जी और राधा जी की मूर्ति स्थित है। कहते हैं कि मेवाड़ में मीराबाई इसी मूर्ति की पूजा किया करती थी और इस मूर्ति को हल्दीघाटी के युद्ध के दौरान मुगलों से बचाकर इस मंदिर में लाकर स्थापित किया गया था। इस मंदिर में भी आप जरूर आना। इस मंदिर का आर्किटेक्चर आपको सबसे ज्यादा अट्रैक्ट करेगा। शाम के समय आमेर किले पर लाइट एंड साउंड शो भी होता है जिसकी टिकट ₹250 पर पर्सन होती है। इसमें आप अमिताभ बच्चन की आवाज में इस किले का इतिहास जान सकते हैं। इसी के साथ हमारा डे वन यहीं पर खत्म हो जाता है। जल महल के पास में आपको काफी बढ़िया रेस्टोरेंट्स मिल जाएंगे। जहां पर आप डिनर करके अपनी होटल में वापस जा सकते हैं। आज है हमारा जयपुर में डे टू और दूसरे दिन की शुरुआत हम करेंगे मोती डूंगरी टेंपल से। यह मंदिर एक छोटी सी डूंगरी यानी पहाड़ी पर बना हुआ है और मोती डूंगरी किले के नीचे स्थित है। मंदिर में स्थापित भगवान गणेश की मूर्ति 500 साल से भी ज्यादा पुरानी बताई जाती है और इसे 1761 में सेठ जयराम पालीवाल द्वारा यहां लाया गया था जो महाराजा माधव सिंह फर्स्ट के साथ उदयपुर आए थे। उन्हें गुजरात से उदयपुर लाया गया था। मंदिर का निर्माण पालीवाल की देखरेख में हुआ था। सिंदूरी रंग के गणेश प्रतिमा की सूंड दाहिनी ओर है। यहां पर भक्तगण लड्डू मिठाई का भोग लगाते हैं। हर साल कम से कम 12,25,000 लोग गणेश जी को सम्मान देते हैं। मंदिर परिसर में हर बुधवार को मेले का आयोजन भी किया जाता है। मंदिर में दर्शन करने के बाद अब हम जाएंगे बिरला मंदिर में जो कि मोती डूंगरी मंदिर के पास में ही स्थित है। सफेद संगमरमर की चमक, नक्काशी के डिटेल्स, अंदर की मूर्तियां, हरे-भरे बगीचे। यह है इस मंदिर की देखने लायक खासियत। मोती डूंगरी मंदिर से बस जरा सा नीचे यह शानदार बिरला मंदिर बना हुआ है जिसे लक्ष्मीारायण मंदिर भी कहते हैं। यह मंदिर पूरा सफेद संगमरमर से बना हुआ है और धूप में तो यह मंदिर दूध जैसा चमकता है। जिस जगह पर यह मंदिर बना हुआ है, उसे जयपुर के राजा ने मंदिर निर्माण के उद्देश्य से ₹1 के टोकन में बिरला समूह को दे दिया था। मंदिर भगवान विष्णु और उनकी पत्नी देवी लक्ष्मी जी को समर्पित है। मंदिर में तीन गुमंद है जो धर्म के तीन मुख्य दृष्टिकोणों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस मंदिर का निर्माण 1988 में बृजमोहन बिरला द्वारा बिरला फाउंडेशन के अंतर्गत करवाया गया था। इस मंदिर में दर्शन करने के बाद यहां से जवाहरलाल नेहरू मार्ग से 2 से 3 कि.मी. के बाद वर्ल्ड ट्रेड पार्क डब्ल्यूटीपी बना हुआ है। आप इस मॉल में भी आ सकते हैं। यह है नए जमाने की जयपुर की पहचान। यह सिर्फ एक मॉल नहीं है। यह एक बहुत ही बड़ा कॉम्प्लेक्स है जिसका आर्किटेक्चर एकदम हटके है। यह 2012 में खुला था और यह अपनी थीम स्ट्रीट्स के लिए जाना जाता है। जैसे रोमन स्ट्रीट या एथेनिक स्ट्रीट जहां आपको अलग-अलग देशों का स्टाइल देखने को मिलेगा। यह मॉल यंग क्राउड के लिए एक पॉपुलर हैंग आउट स्पॉट है। अगर आपको जयपुर की थोड़ी मॉडर्न साइट देखनी है तो आप मालवीय नगर में यहां पर आ सकते हैं। अब इसी रास्ते में आता है जवाहर सर्कल। यह एशिया का सबसे बड़ा गोल पार्क है। इसे जयपुर डेवलपमेंट ऑथॉरिटी जेडीए ने 2009 में बनवाया था। सुबहशाम यहां लोकल्स जोगिंग करने, टहलने, एक्सरसाइज करने या बस रिलैक्स होने के लिए आते हैं। और टूरिस्ट आते हैं यहां पर इस पत्रिका गेट को और तोरण द्वार को देखने के लिए। जब आप जवाहर सर्कल में हो तो पास में ही बने इस शानदार तोरण द्वार को देखें। इसे राजस्थान का प्रवेश द्वार भी कहते हैं। यह तोरण द्वार 2024 में बनकर तैयार हुआ है और इसे पत्रिका गेट वाले आर्किटेक्ट ने ही डिजाइन किया है। यह सफेद बांसवाड़ा मार्बल से बना हुआ है और इसमें पांच मंजिलों पर 216 खंभे और 42 मेहराब है। प्रीवेडिंग शूट के लिए यह जगह आजकल बहुत ज्यादा पॉपुलर हो गई है। तोरणद्वार के पास रील, फोटो, सेल्फीज़ क्लिक करके आप आ जाए पत्रिका गेट पर। जवाहर सर्कल के मेन एंट्रेंस पर ही है यह। कमाल का रंगों से भरा और Instagram रील्स में छाया हुआ पत्रिका गेट। सीरियसली गाइस, यह जगह फोटो लवर्स पैराडाइज है। इसे पनिका मीडिया ग्रुप ने जेडीए के साथ मिलकर बनाया है और यह 2020 के आसपास बनकर तैयार हुआ था। इस गेट के हर एक मेहराब और खंभे पर हाथों से पेंटिंग की गई है। जिसमें राजस्थान के कल्चर, हिस्ट्री और हेरिटेज के अलग-अलग पहलू दिखाए गए हैं। आपको किले, हवा महल जैसे महल, बनी ठनी पेंटिंग, ब्लू पोटरी, महारानी गायत्री जैसे शासकों के चित्र सब कुछ देखने को मिलेगा। यह पूरे राजस्थान की एक रंगीन झलक जैसा है। बस पत्रिका गेट पर परेशानी यह है कि यहां पर लोगों की भीड़ थोड़ी ज्यादा रहती है और साथ में प्रीवेडिंग शूट करने वाले लोगों का तो क्या ही कहना इसीलिए आप यहां पर सुबह जल्दी आ जाए तो आप अकेले अच्छी फोटोज और रील्स बना सकते हैं। अब हम चलते हैं सन टेंपल में छोटी काशी। छोटी काशी की गलता पहाड़ियों पर स्थित सूर्य मंदिर अपने आप में अद्भुत है। यह देश का एकमात्र सूर्य मंदिर है जिस पर उगते सूर्य की पहली किरण पड़ती है। जयपुर की बसावट के दौरान महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने अश्वमेध यज्ञ के बाद भगवान सूर्य को यहां विराजमान करवाया था। पूर्व दिशा में स्थित इस दक्षिण मुखी मंदिर में भगवान सूर्य अपनी पत्नी रोहिणी के साथ विराजमान है। जयपुर वासी आज भी मकर संक्रांति पर गलता में डुबकी लगाने के बाद भगवान सूर्य की उपासना कर दान पुण्य शुरू करते हैं। यह मंदिर गलताजी धाम की ओर जाने वाले पैदल मार्ग के रास्ते में आता है और यहां से आपको पूरे जयपुर सिटी का शानदार पैनोरमिक व्यू दिखाई देता है। अगर यहां पर आप अर्ली मॉर्निंग आते हैं तो आपको देखने को मिलेगा यह ब्यूटीफुल सनराइज। सन टेंपल से 5 मिनट के वॉकिंग डिस्टेंस पर है गलताजी। वैसे तो गलताजी जयपुर के आउटसाइड एरिया में स्थित है। अगर आप बाय रोड यहां पर आते हैं तो आपको आगरा रोड से गलताजी साइड से आना होगा। इस रास्ते में और भी टूरिस्ट प्लेसेस आती हैं। वह हम गलताजी से रिटर्न आते टाइम देखेंगे। पहाड़ियों के बीच में बसा गलताजी मंदिर कमाल की जगह है। भारत में आपको कई अनेकों मंदिर मिल जाएंगे। जहां हिंदू धर्म के लोगों की गहरी आस्था देखी जाती है। लाखों की संख्या में श्रद्धालु मंदिरों में अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं। राजस्थान भी अपने कई धार्मिक जगहों के लिए प्रसिद्ध है। यहां पर आपको कई अनेकों मंदिर देखने को मिलेंगे जो भारत को सांस्कृतिक विरासत से आज भी जोड़े हुए हैं। यहां का ऐसा ही मंदिर है गलताजी मंदिर जो अपनी कई मान्यताओं के लिए जाना जाता है। गलताजी मंदिर को बंदर मंदिर यानी मनके टेंपल के नाम से भी जाना जाता है। गलताजी मंदिर अरावली पहाड़ियों में स्थित है और घने पेड़ों और झाड़ियों से घिरा हुआ है। मंदिर का परिसर शहर के शोरशराबे से एकदम शांत है। यहां पर आकर आपको आध्यात्मिक शांति का एहसास होगा। इस पवित्र स्थल पर आपको हजारों की तादाद में बंदरों की संख्या देखने को मिल जाएगी। यह चंचल जंगली बंदर सुबह और शाम के समय मंदिर परिसर में और उसके आसपास पाए जाते हैं। यहां पर लोग इस पवित्र गलताजी कुंड में डुबकी लगाकर यहां पर बने मंदिरों में दर्शन करते हैं। यहां पर यह है श्री गालव ऋषि जी का मंदिर जो यहां पर तपस्या किया करते थे और यह है सीताराम जी मंदिर। इस मंदिर में श्री राम जी, माता सीता और एक गुफा में हनुमान जी की मूर्ति स्थापित है। और इस मंदिर के ठीक सामने श्री ज्ञान गोपाल जी मंदिर है। इन मंदिरों में आकर भी आप दर्शन जरूर करें। गलता जी जाकर आप उसके बाद अमगढ़ लेपर्ड रिजर्व में भी घूमने जा सकते हैं जो इसी रास्ते में आता है। अभी हम आ गए हैं श्रीनिवास के बालाजी मंदिर में जो इसी रास्ते में आता है। यहां आकर आप हनुमान जी के दर्शन करके थोड़ी देर शांत वातावरण में बैठ सकते हैं। अभी हम पहुंच गए हैं घाट के बालाजी मंदिर में जो अगेन गलताजी वाले रास्ते में ही है। यह मंदिर भी काफी बड़ा और प्राचीन है। यह मंदिर लाल डूंगरी पर स्थित है और काफी दिव्य मंदिर है। तो यहां पर भी आप आ सकते हैं। अब हम जाएंगे सिसोदिया रानी बाग। यह एक खूबसूरत गार्डन पैलेस है जो आगरा रोड के पास में ही बना हुआ है। जयपुर में वैसे तो कई बाग बगीचे हैं लेकिन कुछ बाग-बगीचे जिन्हें खासतौर पर राजा महाराजाओं ने अपनी रानियों के लिए बनवाया है। उनकी सुंदरता सामान्य बगीचों से ज्यादा है। ऐसा ही यह बाग है सिसोदिया रानी का बाग जो अरावली श्रृंखला की पहाड़ियों में स्थित है। इस गार्डन की खूबसूरती ऐसी है कि इसे देखने के बाद आपको इस पर यकीन हो जाएगा। उदयपुर की रानी चंद्रकुंवर सिसोदिया के नाम पर बने इस बाग का निर्माण 1728 में सवाई जय सिंह जी ने करवाया था। यह गार्डन प्यार की एक अनोखी मिसाल पेश करता है। दरअसल जयपुर की महारानी चंद्र कुमार सिसोदिया को प्रकृति से विशेष प्रेम था। वह अक्सर अपने खाली समय में प्रकृति की गोद में आराम करती थी। प्रकृति के प्रति उनके विशेष प्रेम को देखकर राजा सवाई जय सिंह जी ने इस बाग का निर्माण करवाया जिसका नाम सिसोदिया रानी बाग रखा। यह बगीचा न सिर्फ राधा रानी बल्कि राधाकृष्ण के प्रेम का भी प्रतीक है। आसपास की पहाड़ियों के बीच स्थित यह बाग अपनी सुंदरता और संरचना के कारण एक मोस्ट फेमस टूरिस्ट प्लेस है। हरेभरे पेड़, फूलों की क्या और खूबसूरत चारबाग शैली इस बाग को अट्रैक्टिव बनाती है। सिसोदिया रानी का बाग एक्सप्लोर करके लंच करने के बाद आप आ जाए गढ़ गणेश मंदिर जाने के लिए। अरावली पर्वतमाला पर स्थित देश का यह एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां बिना सूंड वाले गणेश जी की प्रतिमा है। कहते हैं कि जब यह मंदिर बन रहा था तब गढ़ गणेश मंदिर तक पहुंचने के लिए हर रोज एक सीढ़ी का निर्माण करवाया जाता था। इस तरह पूरे 365 दिन तक एक-एक सीढ़ी का निर्माण चलता रहा। आज दूर-दूर से सैकड़ों श्रद्धालु 365 सीढ़ियां चढ़कर मंदिर तक पहुंचकर बिना सूंड वाले बाल रूप श्री गणेश जी के दर्शन करते हैं। इस मंदिर की स्थापना के साथ ही यहां फोटोग्राफी पर पाबंदी लगा दी गई थी। कभी भी मंदिर के अंदर गणेश जी की प्रतिमा की फोटो नहीं खींची गई है। यहां से अब हम आ गए हैं गेटोर की छतरियां विजिट करने के लिए। यह जगह गढ़ गणेश मंदिर के पास में और मेन शहर की भीड़भाड़ से थोड़ी दूर है। गेटोर यानी कि गए हुए का ठोर ठिकाना। मतलब जो इस दुनिया से अब जा चुके हैं। जयपुर के फाउंडर सवाई जय सिंह जी से लेकर सवाई भवानी सिंह जी जिनका निधन 2011 में हुआ था। जयपुर के राजघराने के सभी राजाओं का क्रिमेशन यानी कि अंतिम संस्कार इसी जगह पर किया जाता था और बाद में उनकी अस्थियों को हरिद्वार में विसर्जित किया जाता था। उन्हीं की याद में यहां पर यह सारी छतरियां बनी हुई है। अब हम जाएंगे डे टू का ग्रैंड फिनाले करने के लिए यानी डे टू की लास्ट प्लेस विजिट करने के लिए जिसका नाम है नारगड फोर्ट। अरावली की पहाड़ियों के किनारे नारगढ़ किला बना हुआ है। इस किले को हंटेड किला माना जाता है क्योंकि जब इस किले को बनवाया जा रहा था तब इस किले में राजकुमार नार सिंह जी की आत्मा भटका करती थी। इसीलिए इस किले के निर्माण कार्य में बाधा आती थी। इस कारण महाराजा सवाई जय सिंह जी ने इस किले में राजकुमार के नाम से एक मंदिर और किले का नाम राजकुमार के नाम पर रख दिया था। उसके बाद इस किले का निर्माण कार्य अच्छे से हुआ। किले के प्रवेश द्वार से अंदर आते ही आप माधवेंद्र भवन में पहुंच जाते हैं। साल 1734 में जयपुर के संस्थापक कहे जाने वाले महाराजा सवाई जय सिंह जी ने नारगढ़ किले को बनवाया था और लगभग साल 1868 के आसपास यह बनकर तैयार हुआ था। कहते हैं कि राजस्थान का यह एकमात्र ऐसा फोर्ट है जहां कभी भी हमला नहीं हुआ है। इस महल में रानियों के लिए लगभग 12 खास और अद्भुत कमरे बनाए गए हैं। दीवारों पर अलग-अलग चित्र और लाल बलुआ पत्थर से निर्मित इस फोर्ट को जयपुर में सबसे सुरक्षित फोर्ट माना जाता था। इस किले को 1857 के विद्रोह के दौरान यूरोपियन लोगों के पनाहगार के रूप में भी जाना जाता है। नारगढ़ किला ऊंचाई पर स्थित होने के कारण माधवेंद्र भवन के छत से आपको जयपुर शहर का बहुत ही खूबसूरत नजारा दिखाई देता है। टूरिस्ट के अलावा यह किला बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग के लिए भी काफी मशहूर है। यहां पर आमिर खान स्टारर फिल्म रंगदे बसंती की शूटिंग भी हुई थी। इसके बाद से ही यह किला लोगों के बीच ज्यादा मशहूर हो गया था। बाद में लेट सुशांत सिंह राजपूत भी अपनी फिल्म शुद्ध देसी रोमांस के लिए यहां शूटिंग कर चुके हैं। यहां पर दिन ढलने के साथ ही नारगढ़ किले का नया स्वरूप हमें देखने को मिलता है। यहां पर एक सनसेट पॉइंट भी है जहां से आप सनसेट का शानदार व्यू देख सकते हैं। यहां एक तरफ आप फ्री में सनसेट देख सकते हैं और दूसरी ओर ₹100 पर पर्सन देकर लाइव म्यूजिक के साथ में सनसेट का व्यू एंजॉय कर सकते हैं। और वहीं फ्री में तो आपको पता ही है क्या होता है। खैर आप देखिए जयपुर का यह शानदार व्यू और इसी के साथ हमारा डे टू पूरा होता है। आज जयपुर में हमारा आखिरी दिन है और आज हम हवा महल, सिटी पैलेस, जलमल देखेंगे और आइकॉनिक लैंडमार्क्स घूमेंगे। चहल-पहल वाले बाजारों में खो जाएंगे और डे थ्री का ग्रैंड एंड करेंगे एक शानदार नजारे के साथ। लेट्स मेक द मोस्ट ऑफ इट। डे थ्री की शुरुआत में हम सबसे पहले देखेंगे अल्बर्ट हॉल म्यूजियम। हवा महल से 10 मिनट की दूरी पर मौजूद इस म्यूजियम को सरकारी केंद्रीय संग्रहालय भी कहा जाता है। अल्बर्ट हॉल की स्थापना 1876 में 6 फरवरी को प्रिंस ऑफ वेल्स अल्बर्ट एडवर्ड की जयपुर यात्रा के दौरान रखी गई थी। उनके नाम पर ही इस म्यूजियम का नाम रखा गया है। लेकिन इस हॉल का उपयोग कैसे किया जाए? यह दुविधा उस दौरान काफी बनी हुई थी। महाराजा सवाई राम सिंह शुरू में चाहते थे कि संग्रहालय भवन एक टाउन हॉल हो। कुछ ने इसे सांस्कृतिक या शैक्षणिक उपयोग में लाने का सुझाव दिया। लेकिन डॉक्टर थॉमस हॉबी हैंडली ने स्थानीय कारीगरों को अपनी शिल्प कलाकारी दिखाकर उसे यहां प्रोत्साहित करने का सुझाव दिया था। जयपुर के तत्कालीन महाराजा महाराजा सवाई माधव सिंह द्वितीय को उनका विचार पसंद आया और उन्होंने इसे 1880 में जयपुर के स्थानीय शिल्पकारों की कलाकृति को प्रदर्शित करने वाला एक संग्रहालय बनाने का फैसला किया। संग्रहालय को आखिर में 1887 में जनता के लिए खोल दिया गया था। म्यूजियम की भव्य वास्तुकला आपको हैरान कर देगी। यहां की डिजाइनिंग इंडोसेरेमिक शैली में निर्मित है। संग्रहालय को महाराजा राम सिंह के शासन में सैमुअल स्वीटन जेकब द्वारा डिजाइन किया गया था। अब म्यूजियम में जयपुर कला के कुछ बेहतरीन काम, पेंटिंग्स, कलाकृतियां, आभूषण, कालीन धातु और हाथीद की मूर्तियां मौजूद है। मुद्रा शास्त्र में रुचि रखने वालों के लिए आपको अल्बर्ट होल संग्रहालय में सिक्कों का कलेक्शन किसी आकर्षण से कम नहीं लगेगा। यह सिक्के गुप्त, कुषाण, दिल्ली सल्तनत और अंग्रेजों के समय के हैं। अल्बर्ट होल संग्रहालय भी भारत के उन छह जगहों में से एक है जहां आप मिस्र की मम्मी को देख सकते हैं। यहां मिस्र में एक पुजारी के परिवार की महिला सदस्य टू-टू मम्मी है। अब नेक्स्ट स्टॉप थोड़ा हटके है। चलिए मूवी देखते हैं। लेकिन किसी आर्म हॉल में नहीं। यह है राज मंदिर सिनेमा। 1967 से जयपुर की शान। यहां आकर आप मॉडर्न मल्टीप्लेक्स तो भूल ही जाओगे। राज मंदिर सिनेमा के अंदर जाना जैसे किसी शाही मेरिंग शेप वाले पुराने महल में आ गए हो। बड़े-बड़े झूमर और आरामदायक सीट। यहां मूवी देखना एक एक्सपीरियंस है। इसे प्राइड ऑफ एशिया भी कहा जाता है। इस अनोखी शान शौकत के बीच बैठकर फिल्म देखना वाकई खास लगता है। यह सिनेमा हॉल लोकल्स और टूरिस्ट दोनों के बीच बहुत ही ज्यादा पॉपुलर है। यह है द्रवर्ती रिवर बर्ड पार्क। शहर की भागदौड़ के बीच अगर थोड़ी देर प्रकृति के पास जाना हो तो आप द्रवती रिवर बर्ड पार्क आ सकते हैं। यह द्रवती नदी को फिर से जिंदा करने के बड़े प्रोजेक्ट का हिस्सा है। यह बनी पार्क के पास में मौजूद है। जहां पहले अमानीशा वाटर वर्क्स था। नदी के किनारे कई पार्क बनाए गए हैं। यह उनमें से एक है। इसे पक्षियों की रहने की जगह और एक शांत हरेभरे पार्क के तौर पर डेवलप किया गया है। होनेस्टली कहूं तो नाम बर्ड पार्क है। पर यहां बहुत सारे एग्जोटिक पक्षियों की उम्मीद मत करना। हां, यह शांत टहलने या बैठने के लिए एक अच्छा हराभरा पार्क जरूर है। यहां के कोई एंट्री चार्जेस भी नहीं है, तो आप फ्री में यहां आकर बैठ सकते हैं। अब हम आ गए हैं इसार लाट विजिट करने के लिए। अगर आपको जयपुर सिटी का बड आई व्यू देखना है, तो आप इसारलाट को जरूर विजिट करें। इसारलाठ जिसे सरगासुली टावर भी कहते हैं। यह 1949 से छोटी चौपड़ में त्रिपोलिया गेट के पास में शान से खड़ा है। यह जयपुर का अपना विजय स्तंभ है। इसे महाराजा ईश्वरी सिंह ने अपने सौतेले भाई के खिलाफ राजमहल की लड़ाई जीतने की खुशी में बनवाया था। यह सात मंजिला ऊंचा है और कहते हैं इसका डिजाइन कुतुब मीनार और चित्तौड़गढ़ के कीर्ति स्तंभ से इंस्पायर्ड है। इसकी घुमावदार सीढ़ियां जो कि करीब 264 है। यह चढ़ने की मेहनत वसूल हो जाती है जब आप ऊपर पहुंचकर 360° व्यू देखते हैं। यहां से आप देख पाएंगे सिटी पैलेस, हवा महल, जंतरमंतर, नारगढ़ किला, गढ़ गणेश जी और गुलाबी शहर। इस सारलाट घूमने के बाद अब बारी है जंतरमंतर घूमने की। जंतर यानी कि यंत्र और मंत्र यानी कि गिनती करना और यह जंतरमंतर आने वाले लाखों सालों तक धरती तारे प्लेनेट ग्रह नक्षत्र इनका एक्यूरेट समय और कैलकुलेशन बताने की क्षमता रखता है। जंतरमंतर एक ऐतिहासिक स्मारक है जो कि भारत की पांच खगोलीय वैधशालाओं में से सबसे बड़ा है। इसका निर्माण 18वीं सदी में महाराजा सवाई जय सिंह जी द्वारा करवाया गया था। यह राजस्थान की मोस्ट विजिटेड प्लेसेस में से एक है जिसे अपने सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और वैज्ञानिक महत्व की वजह से वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स में शामिल किया गया है। जंतरमंतर का निर्माण जयपुर के संस्थापक एवं खगोल शास्त्री महाराजा सवाई जय सिंह द्वारा अंतरिक्ष और समय की सही जानकारी प्राप्त करने के उद्देश्य से 1724 से 1734 के बीच करवाया गया था। इसकी स्थापना से पहले उन्होंने विश्व के अलग-अलग देशों में खगोल विज्ञान के प्रमुख और महत्वपूर्ण ग्रंथों की स्टडी की थी। जिसके बाद उस दौरान के प्रसिद्ध एवं प्रख्यात खगोल शास्त्रियों की मदद से महाराजा सवाई जय सिंह जी ने जयपुर, दिल्ली, बनारस, उज्जैन और मथुरा में पांच वेदशालाओं का निर्माण हिंदू खगोल शास्त्र के आधार पर करवाया था। इस विशाल वेधशाला में कई महत्वपूर्ण खगोल यंत्र भी शामिल किए गए हैं। महाराजा सवाई जय सिंह जी द्वारा निर्मित पांच वेधशालाओं में से आज केवल दिल्ली और जयपुर के जंतरमंतर ही शेष बचे हैं। बाकी पुराने खंडर में तब्दील हो चुके हैं। यह विशाल वेधशाला करीब 18,700 वर्ग मीटर क्षेत्रों में फैली हुई है। इसमें समय, मौसम और अंतरिक्ष संबंधी सही भविष्यवाणी करने के लिए कई अलग-अलग खगोलीय उपकरणों का उपयोग किया गया है। यहां 14 विशेष खगोलीय यंत्र रखे गए हैं जो कि तारे और गति की स्थिति जानने, समय मापने, मौसम की स्थिति जानने, आकाशीय ऊंचाई का पता लगाने और ग्रहण की भविष्यवाणी करने समेत सौरमंडल की तमाम गतिविधियों की जानकारी हासिल करने में मदद करते हैं। जंतरमंतर के ठीक बगल में है आलीशान सिटी पैलेस, जो जयपुर के राज परिवार का घर था और आज भी है। इस पैलेस में पर पर्सन ₹300 की एंट्री टिकट है और अगर आप पैलेस में रॉयल एक्सपीरियंस लेना चाहते हैं तो आप 3000 की टिकट लेकर यहां पर रॉयल रूम्स शीश महल देख सकते हैं जहां पर आज भी राजा महाराजा रहते हैं। इस पैलेस को महाराजा सवाई जय सिंह जी के द्वारा 1729 में बनवाया गया था और यह पैलेस राजपूत शैली, मुगल शैली, यूरोपियन शैली इन तीनों शैलियों का मिश्रण है। सिटी पैलेस के अंदर आते ही सबसे पहले आपको यह वाला मुबारक महल नजर आता है। इस मुबारक महल को महाराजा सवाई माधव सिंह द्वितीय के समय उनके खास मेहमानों के स्वागत के लिए बनवाया गया था और आज के टाइम पर इस मुबारक महल को टेक्सटाइल गैलरी यानी म्यूजियम में कन्वर्ट कर दिया गया है और इसके अंदर आपको आज भी महाराजा और रानियों के कपड़े देखने को मिलते हैं जो उस समय राजा महाराजा पहना करते थे। मुबारक महल देखने के बाद आप दीवान खास में पहुंच जाते हैं जिसे सर्वतो भद्रा चौक भी कहा जाता है। इस जगह पर महाराजा का शाही दरबार लगता था। महाराजा के खास मंत्री और जो महाराजा के सिपाही थे उनकी मीटिंग्स इसी जगह पर हुआ करती थी और इस जगह पर आम जनता को आने के लिए मनाई थी। दीवान-ए-ने खास में आपको यह दो बड़े चांदी के गंगाजली नजर आते हैं जिन्हें 14,000 चांदी के सिक्कों को पिघलाकर बनाया गया था। महाराजा माधव सिंह द्वितीय बहुत ही धार्मिक थे और वह गंगाजल लिया करते थे। उनकी इंग्लैंड की यात्रा में इसी गंगाजली का प्रयोग किया गया था और इनकी कैपेसिटी 4000 लीटर की है। अब रिद्धि सिद्धि पोल द्वार से अंदर आने के बाद सिटी पैलेस का आपको यह वाला हिस्सा नजर आता है। यहां पर आज भी राज परिवार के लोग रहते हैं और यहीं से आप यहां पर आकर एक्सपीरियंस कर सकते हैं राजा महाराजाओं की लाइफस्ट। सिटी पैलेस से अब हम आ गए हैं हवा महल तक। हवा महल को महाराजा सवाई प्रताप सिंह के द्वारा 1799 में वास्तुकार लालचंद उस्ता की देखरेख में बनवाया गया था। पिरामिड की आकृति में बने इस 80 फीट से भी ऊंचे पांच मंजिला इमारत में इसकी 953 खिड़कियां बनी हुई है। जहां से ठंडी-ठंडी हवा आती है। इसीलिए इसे हवा महल कहा जाता है और इस हवा महल के पांचों मंजिलों को रतन मंदिर, विचित्र मंदिर, प्रकाश मंदिर के नाम से जाना जाता है। हवा महल की आकृति श्री कृष्ण जी के मुकुट की तरह बनाई गई है। और यह महल किसी भी पिलर या नींव पर खड़ा नहीं है। इस महल के ऊपरी हिस्से में जाने के लिए आपको रैंप से चलकर जाना होता है और यहां पर सिटी पैलेस से हवा महल आने के लिए सीक्रेट रास्ता भी बना हुआ था। उसी रास्ते से राज परिवार की महिलाएं एवं रानी महारानी को पालकी में बैठाकर इसी रास्ते के द्वारा हवा महल के ऊपरी हिस्से में लेकर जाया जाता था। राज परिवार की रानियां एवं राजकुमारियां इन्हीं झरोखों में बैठकर नीचे होने वाले तीज गणगौर की यात्राएं और सवारियां देखा करती थी। क्योंकि राज परिवार की महिलाओं को महल से बाहर आने की अनुमति नहीं थी। यहीं पर पास में स्थित है गोविंद देव जी मंदिर जो कि काफी प्रसिद्ध मंदिर है और यह मंदिर गोविंद देव जी को समर्पित है जो भगवान कृष्ण का ही एक रूप है और माना जाता है कि यहां जो मूर्ति है वह बिल्कुल वैसी ही दिखती है जैसे भगवान कृष्ण अपने अवतार के समय दिखते थे। मूर्ति को राजा मानसिंह वृंदावन से लाए थे और बाद में महाराजा सवाई जय सिंह सेकंड ने यहां स्थापित की थी। हम जब इस मंदिर में पहुंचे थे तब बस थोड़ी देर बाद मंदिर बंद हो गया था। तो आप किसी भी मंदिर में जाएं बस टाइम देखकर जाना ताकि आप ठीक से दर्शन कर पाए। अब हम आ गए हैं चौकी ढाणी विलेज में। यह एक आर्टिफिशियल राजस्थानी विलेज है। यहां पर आपको राजस्थानी संस्कृति, कल्चर और विरासत की झलक देखने को मिलेगी। चौकीानी गांव चौकीानी रिसोर्ट के पास ही है और यह राजस्थान की संस्कृति का केंद्र है। 1889 में इसे बनाया गया था। इस गांव में आपको राजस्थानी संस्कृति का असली रंग देखने को मिलेगा। जैसे पारंपरिक कालबेलिया डांस, तरह-तरह की दिलचस्प चीजें, शानदार एक्टिविटीज, स्वादिष्ट खाना और भी बहुत कुछ। अगर आप राजस्थानी कल्चर को एक्सपीरियंस करना चाहते हैं तो यहां पर आ सकते हैं। अब हम एक्सप्लोर करेंगे जयपुर के बाजार। जयपुर में बापू बाजार, नेहरू बाजार, त्रिपोलिया बाजार, जोहरी बाजार, किशनपोल बाजार और चांदपोल बाजार है। जिनकी अपनी-अपनी खासियत है। जयपुर में आकर अगर आप यहां के बाजारों में नहीं घूमे तो फिर जयपुर आने का कोई मतलब नहीं बनता है। यहां शॉपिंग करना अपने आप में एक अलग एक्सपीरियंस है। यहां कई मेन बाजार है। ज्यादातर पुराने शहर के अंदर है। जोहरी बाजार जैसा नाम वैसा काम। यह गहनो ज्वेलरी के लिए बेस्ट है और बापू बाजार तो रंगों का मेला है। यहां आपको बांधनी और लहरिया के कपड़े, ब्लॉक प्रिंट वाले कपड़े और सबसे खास मोजड़ी यानी राजस्थानी जूतियां मिलती है और खूबसूरत लाख की चूड़ियां चाहिए तो आपको त्रिपोलिया बाजार आना होगा। साथ ही चांदपोल बाजार हैंडीक्राफ्ट्स और मार्बल की मूर्तियों के लिए बढ़िया है। वहीं नेहरू बाजार भी जूतियों और छोटे-मोटे गिफ्ट्स के लिए अच्छा है। और किशन पोल बाजार कपड़ों और लकड़ी के सामान के लिए जाना जाता है। जयपुर के बाजार खाने-पीने के मामले में भी काफी ज्यादा फेमस है। यहां पर आप जयपुर की फेमस स्ट्रीट फूड प्लेसेस को भी एक्सप्लोर कर सकते हैं। यहां ज्यादातर बाजार 10-1:00 बजे खुलते हैं और रात 8 9:00 बजे तक बंद हो जाते हैं। सभी बाजार घूमने के बाद अब हम आ गए हैं खजाना महल देखने के लिए। म्यूजियम तो आपने कई देखे होंगे लेकिन यह एक अनोखा म्यूजियम है। यहां की खास बात यह है कि इसमें दुनिया की अनोखी चीजें और बेशकीमती हीरे जवाहरात का एग्ज़िबिशन है और इस म्यूजियम में 15,000 से भी ज्यादा अनोखी और बेशकीमती चीजें आप देख सकते हैं। और साथ ही म्यूजियम में लगभग 100 साल से लेकर 20,000 साल पुराने से अधिक आभूषणों का कलेक्शन है। जिसमें डायनासोर की हड्डी, कोहिनूर हीरे का रेप्लिका, शार्क के दांत, हीरे, मोती, जेम स्टोन, टूटते हुए तारे का पत्थर और ज्वालामुखी से निकला कीमती पत्थर सहित सभी प्रकार के रत्न सजाकर रखे गए हैं। यहां की सबसे अट्रैक्टिव चीज है यह वर्ल्ड की सबसे बड़ी गोल्ड रिंग। यहां पर आपको और भी बहुत कुछ यूनिक चीजें देखने को मिलेगी। हमारी जयपुर ट्रिप का लास्ट पड़ाव है यह जलमल। यह मानसागर झील के बीचों-बीच ऐसे खड़ा है जैसे तैर रहा हो। इस पैलेस को महाराजा सवाई प्रताप सिंह जी के द्वारा सन 1699 में बनवाया गया था और यह पैलेस तीन मंजिला पैलेस है जो डेढ़ मंजिल पानी के अंदर है और इस पैलेस में टूरिस्ट्स को जाना अलाउड नहीं है। जल महल को देखने का बेस्ट टाइम सुबह सूरज निकलने का वक्त या शाम को सूरज ढलने का वक्त यह उस समय बहुत खूबसूरत लगता है और शाम के समय तो इस महल पर लाइट्स भी जलती है जिससे पानी में इसका रिफ्लेक्शन और भी ज्यादा प्यारा लगता है। तो गाइस, इसी के साथ खत्म होती है हमारी पिंक सिटी की यह तीन दिन की शानदार ट्रिप। गाइस, आप कमेंट करके बताएं आपको सबसे ज्यादा कौन सी प्लेस बढ़िया लगी। मेरे लिए तो सबसे खास पल शायद नारगढ़ किले से वह सनसेट देखना था। पूरे शहर को उस सुनहरी रोशनी से नहाते देखना बस सुकून मिल गया। मुझे पूरी उम्मीद है कि इस डिटेल गाइड वीडियो में मैंने अपने एक्सपीरियंस और टिप्स शेयर किए हैं। अगर आपके मन में इस वीडियो के रिगार्डिंग कोई भी सवाल है तो आप कमेंट करके पूछ सकते हैं। अगर आपने अभी तक चैनल को सब्सक्राइब नहीं किया है तो प्लीज कर लीजिए। वीडियो अच्छा लगा है तो लाइक करें और अपने दोस्तों, अपने पार्टनर, अपनी फैमिली के साथ इस वीडियो को शेयर जरूर करें और मुझे आप Instagram पर भी फॉलो कर लीजिए। मिलते हैं नेक्स्ट वीडियो में। तब तक घूमते फिरते रहिए और सेफ रहिए। [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत]
Jaipur Tour Full Guide | 3 Days in Pink City | Forts, Food, Temples & Local Markets | Hindi Vlog
Welcome to the Ultimate Jaipur Travel Guide in Hindi! ✨
In this detailed 3-day Jaipur Vlog, we explore the heart of Rajasthan — The Pink City. From majestic forts like Amber, Jaigarh, Nahargarh, to spiritual spots like Galta Ji & Govind Dev Ji, from royal palaces like City Palace & Hawa Mahal, to vibrant markets like Bapu Bazaar & Johri Bazaar – this travel guide covers everything you need!
👉 This video includes:
✅ How to reach Jaipur
✅ Where to stay (luxury + budget hotels)
✅ Transportation tips (auto, bike rental, taxi)
✅ Best places to visit – Day-wise plan
✅ Local food recommendations (Dal Bati, Rajasthani Thali)
✅ Hidden Gems (Gatore Ki Chhatriyan, Khazana Mahal)
✅ Shopping tips & famous markets
🎥 Perfect for:
Couples, Solo Travelers, Family Trips, and Anyone Planning to Visit Jaipur!
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✅ Chapter Timestamps –
00:00 – Introduction
01:46 – How To Reach
02:12 – Accommodation
03:14 – How To Travel
04:22 – Amber Palace
08:58 – Rajasthani Thali
09:40 – Jaigarh Fort
10:28 – Panna Meena Kund
11:03 – Jagatshiromani Temple
11:58 – Moti Dungri Temple
12:44 – Birla Mandir
13:36 – WTP
14:12 – Jawahar Circle
14:32 – Toran Dwar
15:00 – Patrika Gate
15:54 – Sun Temple
16:43 – Galta Ji
18:49 – Sisodiya Rani Ka Bagh
20:09 – Garh Ganesh Ji
20:47 – Gatore Ki Chhatriyan
21:20 – Nahargarh Fort
23:27 – Albert Hall Museum
25:27 – Raj Mandir Cinema
26:01 – Dravyavati Bird Park
26:41 – Isarlat
27:32 – Jantar Mantar
29:28 – City Palace
31:12 – Hawa Mahal
32:20 – Govind Dev Ji Temple
32:53 – Chokhi Dhani
33:29 – Local Bazaars
34:40 – Khazana Mahal
35:25 – Jal Mahal
36:00 – Outro
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📍 Places Covered in this Video:
Day – 1
1. Amer Fort
2. Jaigarh Fort
3. Panna Meena Ka Kund
4. Jagatshiromani Temple
Day – 2
5. Moti Dungri Temple
6. Birla Temple
7. World Trade Park
8. Jawahar Circle
9. Toran Dwar
10. Patrika Gate
11. Sun Temple
12. Galta Ji
13. Amagarh Leopard Reserve
14. Sree Niwas ke Balaji Temple
15. Sri Ghat ke Balaji Temple
16. Sisodiya Rani Ka Bagh
17. Garh Ganesh Ji Temple
18. Gatore Ki Chhatriyan
19. Nahargarh Fort
Day – 3
20. Albert Hall Museum
21. Raj Mandir Cinema
22. Dravyavati Bird Park
23. Isarlat
24. Jantar Mantar
25. City Palace
26. Hawa Mahal
27. Govind dev ji Temple
28. Chokhi Dhani
29. Jaipur Bazaars
30. Jaipur Food
31. Khazana Mahal
32. Jal Mahal
🗓️ Free Entry Dates for Jaipur Monuments:
1. Rajasthan Foundation Day – 30 March
2. World Heritage Day – 18 April
3. International Museum Day – 18 May
4. World Tourism Day – 27 September
5. Independence Day – 15 August
💡 Note: These free entry days mostly apply to government-managed sites, especially those under Rajasthan Tourism Department or Archaeological Department. Privately owned or trust-managed sites may not follow this rule.
➟Chokhi Dhani
● Rajasthani Dinner
Adult @ Rs. 1000/-
Child @ Rs. 600/-
● Royal Thali
Adult @ Rs. 1200/-
Child @ Rs. 750/-
● Multicuisine Buffet at Resort
Adult @ Rs. 1700/- per person
Child @ Rs. 800/- per person
🛕 Govind Dev Ji Temple Timings (Daily Schedule)
No. Aarti / Darshan Timings
1. Mangala Aarti 5:00 AM – 5:30 AM
2. Dhoop Darshan 8:30 AM – 9:00 AM
3. Shringar Aarti 9:30 AM – 10:00 AM
4. Rajbhog Aarti 11:30 AM – 12:00 PM
5. Utthapan Darshan 5:00 PM – 5:30 PM
6. Sandhya Aarti 5:45 PM – 6:30 PM
7. Shayan Aarti 8:00 PM – 8:30 PM
BIKE RENTAL –
https://www.rentalwheel.in
https://joyridesrental.com
HOTEL –
►Hotel Sarang Palace – Boutique Stays & Candlelight Dining
►WelcomHeritage Traditional Haveli
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24 Comments
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Ticket price in chaukidhani? What it includes?
Both.vistar.ma.sam.gaya🎉🎉❤
हिंदी में बनानी चाहिए थी वीडियो
Nice
Superb information👍
Superb vlog 👏🏻
Sir temporary kharach kitna aa sakta hai
Would you like to inform best guide contact number to explore Jaipur by personal car with budget hotels
Very informative video
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आपने वीडियो बहुत ही अच्छी तरह हमें दिखाई और बनाया भी है आपने जो बरसों पहले हमने नहीं देखा था वह चीज भी आपने हमें दिखाई और इस वीडियो के जरिए हमें बहुत कुछ देखने का हासिल हुआ है और समझने के लिए भी हमको बहुत ही अच्छा ध्यान में आया कैसा जयपुर के अंदर इतनी सारी चीज है घूमने लायक देखने के लायक हवा महल से लेकर सूर्य से लेकर हर मंदिर के बारे में आपने बहुत ही अच्छी तरह लिखा है आपका खूब खूब धन्यवाद भारत देश की जनता आपसे खुश है और इस वीडियो के जरिए से आपने बहुत ही बढ़िया हमें दिखाई खूब खूब धन्यवाद
शानदार
Ak video me full information good bhai 🙏
HI bro …. Nice video …Hows the weather i am planning in April Last week
Beautiful video
Howz the weather
M planning in december 1st week?
Jaipur pink City khubasurat sahar and Rajasthan❤❤❤❤
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