In the Heart of Ushiku Daibutsu | Tokyo, Japan | Travel with Javed Chaudhry
टोक्यो के बाहर यह स्टैचू है महात्मा बुद्ध का यह 390 फीट है और दुनिया में सबसे ऊंचा स्टैचू कहा जाता है जब यह जापान में बना था ब्रास का बना हुआ है और यह बहुत ही खूबसूरत है और पूरी दुनिया से लोग इसको देखने के लिए आते हैं तो मेरे साथ
मेरे दोस्त हैं इनका नाम है इरफान सिद्दीकी साहब यह खुद बहुत जबरदस्त किस्म के कॉलमनिस्ट है मैं इनका रीडर हूं मुस्तकिल और इनकी दावत पर मैं यहां जापान आया हूं और इनका मेहमान हूं तो सिद्दीकी साहब मुझे इरफान सिद्दीकी साहब यहां पर लेके आए हैं और मैं इस स्टैचू को एंजॉय कर
रहा हूं इस वक्त ब्रॉस का है ये जाहिर है मेटल का बना हुआ है और इसको 1993 में मेरा ख्याल है कंप्लीट हुआ था और जो ये इरफान सिद्दीकी साहब बता रहे हैं कि जो पाकिस्तान की सबसे ऊंची बिल्डिंग थी वो हबीब बैंक प्लाजा और कराची के अंदर वोह
100 फीट है और 100 मीटर और ये जो है कितने मीटर सर ये 120 120 मीटर 390 फीट 390 फीट 120 मीटर तो आप यह समझेंगे जब यह बना था तो उस वक्त ये दुनिया का सबसे ऊंचा मजस था और अब यह पांचवें नंबर पे है पहले जो ऊंचे
मजस मेंे हैं इसलिए बामियान के अंदर जब बहुत ऊंचा मजमा महात्मा बत का तालिबान के दौर में जब उसको ब्रेक करने की कोशिश की जा रही थी तो जपनीज गवर्नमेंट ने यह ऑफर की थी कि आप हमें दे दें इसको और हम इसका चार्ज ले लेते और बल्कि पेमेंट करने के
लिए भी तैयार थे लेकिन उस वक्त हमने कमा लिए किया मुसलमानों ने के बम लगा के तोपों के जरिए उसको तोड़ दिया लेकिन किसी को दिया नहीं तो पता नहीं उस बुत शिकनी का क्या फायदा हुआ था हमें यहां से टिकट लेना पड़ता है और उसके बाद
अंदर इसके ऊपर जाते हैं लिफ्ट है सीढ़िया है ऊपर टॉप तक जाते हैं मैं आपको अंदर से भी दिखाऊंगा अभी टिकट लेने के बाद अब आगे चल रहे हैं जी और यहां पर टूरिस्ट खड़े हैं और मेरा ख्याल है ये गाइडेड टूर होगा गाइड्स होंगे [संगीत] साथ इर्य फन कमिट साइट य
बी ये विश काउंटर है यहां पर खड़े होके अपनी विश लिखते हैं लिखने के बाद यहां लटका देते हैं और सबका ख्याल यह है कि इससे विश पूरी हो जाएगी इस यह सारी ख्वाहिशें लटकी हुई हैं और दुनिया में जितनी भी ख्वाहिश होते हैं वह लटकी रह
जाती हैं क्योंकि ख्वाहिश लटकाने से पूरी नहीं होती करने से पूरी होती है तो जहां जितना टाइम यहां पर लिख के लटकाने में जाया हो जाता है उससे बेहतर यह है कि इंसान जो है वो काम करे मेहनत करे और उसके बाद जाके विज पूरी हो ये बड़ा मजे का जी
इन्होंने बनाया हुआ है वाटर बॉडी और बांस लगा के होली वाटर होली वाटर है और दुनिया में जितने भी मजहब है उनके अंदर पत्थर है उनके अंदर पानी है और फिर फेरे हैं यह दुनिया के हर मजहब के अंदर है यानी कोई मजहब भी ऐसा नहीं है कि जिसके अंदर होली वाटर का
कांसेप्ट ना हो सबका ख्याल यह है कि पानी जो है उसका मजहब के साथ बड़ा गहरा ताल्लुक है ऐसी बात नहीं है पानी का इंसान के साथ बड़ा गहरा ताल्लुक है पानी है तो जिंदगी है पानी नहीं है तो जिंदगी नहीं है तो यहां पे ये और ये ये बहुत ही मजेदार
इन्होंने गेट टाइप बनाया हुआ ऊपर देखें जी हा इसके अंदर बेल टावल है घंटा बजाते हैं थोड़ी देर बाद और उसके बाद ये यह बड़ा मजे की बनाई हु बालकनी इन्होंने और आई विश के मैं भी एक इस टाइप के बनाऊ इंशाल्लाह ये देखिएगा एक घंटा बजा के मैं आपको दिखाता
हूं कि यह है और यह देखें बंद कर दे इसको हे बुद्ध का मजस मा दुनिया में सबसे ऊंचा टोक्यो के अंदर इसे देखने के लिए पूरी दुनिया से लोग आते हैं अभी हमने घंटा बजाया और घंटा बजाने का अपना एक मजा होता है य इंसान ने सबसे पहले इस टाइप
के काम करने शुरू किए थे तो एक इंडियन फिल्म थी जिसमें उसने कहा कि मैं को मंदर का घंटा हूं कि जिसे जो चाहे आक बजा जाता है तो यह वो घंटा है जिसको जो चाहे आक बजाया जाए जापान का कमाल यह है कि क्लीनलीनेस
और जापनीज कल्चर जो है वो हैरान कुन है दुनिया में मेरा नहीं ख्याल कि कोई कौम इतनी साफ सुथरी पुर अमन और आराम से अपनी जिंदगी गुजारने वाली हो सकती है यहां सुबह से मैंने जो देखा वह कमाल ही है आहिस्ता आहिस्ता आपको मैं बताता जाऊंगा एक तो यहां
पे जो बच्चों की स्कूलिंग है वो बड़ी दिलचस्प है जी एक तो हर किस्म का एज का जो बच्चा है और मुख्तलिफ कैटेगरी के जो बच्चे हैं उन सबको इन्होंने इक्वल रखा हुआ है यहां पर जरूरी है कि बच्चे पैदल स्कूल आते हैं कोई बच्चा गाड़ी प नहीं आता उसकी रीजन
यह है कि जब गाड़ियों में बच्चे देखते हैं बड़ी गाड़ी छोटी गाड़ी तो फिर वो कंपैरिजन आ जाता है तो उसके बजाय सब बच्चों के लिए लाजिम है कि वह पैदल स्कूल आए और जो एक लोकैलिटी होती है बच्चों के लिए उस लोकैलिटी के तमाम जो वालदैन है उन सबके
लिए लाजिम है कि उन्होंने डेस कोई तय किए होते हैं कि दो वालदैन जो है वो फैसला कर लेते हैं कि फला दिन हम उस लोकैलिटी के तमाम बच्चों को खुद स्कूल छोड़ के आएंगे तो एक जो पेरेंट होता है वो आगे बच्चों के लग जाता है और उसके बाद जो दूसरा पेरेंट
होता है बच्चों के एंड पे मसल फर्ज करें कि एक जगह है जहां पर 16 बच्चे हैं तो दो लोग होंगे जो एक बच्चा जो होगा वह आगे हो जाएगा बच्चों के और जो दूसरा होगा बच्चों के आखिर में हो जाएगा तो वो इस तरह स्कूल छोड़ के आते हैं
और फिर उसी तरह स्कूल से लेक आते हैं और लंच जो होता है वह स्कूल में बच्चों को दिया जाता है और जो बच्चों की फीस है वह बड़ी दिलचस्प है जी कि आपकी जो इनकम है उसके मुताबिक फीस तय होगी अगर आपकी इनकम
कम है तो आपकी फीस कम होगी आपके बच्चे की और अगर आपकी इनकम ज्यादा है तो आपके बच्चे की फीस ज्यादा होगी इनकम से रिलेटेड और एक खास इनकम के बाद बच्चे की फीस जो है फ्री हो जाती लेकिन वह बताया नहीं जाता किसी को ताकि बच्चे इनफीरियर फील ना करें तो यह
मैंने सुबह मुआयना किया कि दो पेरेंट्स जो बच्चों के हैं उन्होंने झंडे उठाए हुए थे एक झंडा ा लेक आगे खड़ा था एक झंडा लेकर पीछे सारे बच्चे जो हैं वो कितारत जा रहे थे और स्कूल छोड़ के आए उनको फिर उसके बाद जब छुट्टी होगी
तो वही पेरेंट्स जो होंगे वो लेंगे बच्चों को तो लोकैलिटी के अंदर सबने अपना अपना दिन तय किया हुआ है सब बच्चों को लेके यह बड़ी मुझे अच्छी और दिलचस्प चीज लगी यहां पर इरफान सिद्दीकी साहब ने शादी के बारे में बड़ा मजे का बताया जी के जब किसी की
शादी होती है तो कार्ड भेजता है और कार्ड में वो लिख जाता है कि इतनी सलामी आपने देनी है जो बड़ों के लिए होती है वो सलामी बच्चों के लिए भी होती है और उसी इलामी से सारे खराज जात पूरे किए जाते हैं और बाकी
कुछ पैसे बच जाते हैं जो मियां बीवी शुरू में एंजॉय करते हैं उन पैसों को तो ये बड़ी अच्छी ट्रेडीशन है पाकिस्तान के अंदर पंजाब के अंदर भी होती थी लेकिन अब हमने आहिस्ता आहिस्ता इसको खत्म कर दिया हुआ है जो मेरा ख्याल है बहुत अच्छा था ताकि शादी
कम से कम बंदे को फ्री पड़नी चाहिए तो जापनीज की ये बड़ी जबरदस्त आदत है एक और चीज पूरे जापान में या टोक्यो में जो मैं दो दिन से हूं यहां पर मैंने डस्टबिन नहीं देखी उसकी वजह यह है कि यहां पर लोग गन डालते ही नहीं है ये एक नेक्स्ट लेवल की
सफाई पसंदी है कि आप डस्ट बिन नहीं खत्म कर दें कोई किसी के पास अगर ट्रैश है तो उसने उठा के अपने घर लेकर जाना है उसने वहां सड़क प या किसी और जगह नहीं फेंकना ल अगर आपके पास खाली बटल है या कोई रैपर है
तो लोग अपनी जेब में डाल के उसको घर लेकर जाते हैं और फिर वहीं पर उसको डिस्पोज ऑफ करते हैं बाहर नहीं डिस्पोज ऑफ करते स्कूल से आने वाले बच्चे जो होते हैं उनके हाथों में छड़िया होती हैं जिससे वो नीचे नीचे अगर किसी जगह कोई सिगरेट का टोटा पड़ा हुआ
है कोई कागज पड़ा हुआ है तो वो भी इकट्ठा करते हुए वापस जाते हैं तो इसके अलावा मैंने देखा कि एक जगह पर एक सड़क के ऊपर जो मोहल्ले के लोग थे जो बुजुर्ग थे वह सुबह-सुबह आक सफाई कर रहे थे तो लोग खुद सफाई करते हैं और म्युनिसिपल कार्पोरेशन भी करती होगी
डेफिनेटली लेकिन लोग इसको जिम्मेदारी समझते हैं अपनी कि हमने सफाई खुद करनी है तो यह जापनीज के अंदर बड़ी अच्छी आदत आदत मैंने देखी कि इंतहा दर्जे के सफाई पसंद है फिर लोग यहां पे एक दूसरे के साथ बात नहीं करते यह आपस में इंटरेक्ट करने के
खिलाफ है चुप करके बैठे रहते हैं और बिल्कुल किसी किसी से मिलने के लिए नहीं जाते एंटी सोशल है बिल्कुल सोशल नहीं है ज इनकी जितनी ख्वाहिश जितने प्रॉब्लम्स होते हैं अपने तक महदूद रखते हैं लोगों तक पता ही नहीं चलता इसलिए यहां पर खुदकुशी बहुत
ज्यादा है एक साल में 40 हजार बंदा जो है ऑलमोस्ट खुदकुशी कर जाता है जो दुनिया में सबसे ज्यादा यहां पर एक सुसाइड फॉरेस्ट भी है जो मैंने किसी जगह पढ़ा था कि वहां लोग उसके अंदर चले जाते हैं और वहां से निकलते नहीं है वहीं मर जाते हैं तो उसकी शायद
रीजन यह है कि लोग एंटी सोशल है तो जब आप कम्युनिकेट नहीं करेंगे मिलेंगे नहीं लोगों से अपने प्रॉब्लम शेयर नहीं करेंगे तो डेफिनेटली अंदर कुटन पैदा हो जाती है तो यह इस मामले में बहुत बैगिंग नहीं करते कोई जापनीज किसी जपनीज से बल्कि किसी से
पैसे नहीं मांगता और अगर कोई मांग रहा हो तो पूरा पूरी सोसाइटी उसको बुरा समझती है तो यह कुछ इनकी हैब्स है जो आहिस्ता मैं आपको बताता भी जाऊंगा जापान से कि क्या-क्या इनके अंदर दिलचस्प चीजें हैं यहां पे हम आए हैं तो यह शूज रखने के लिए
इन्होंने बाहर लफाफे लगाए क्योंकि उसकी वजह यह है कि इनकी तो इबादत का है बुधा का मजस में है तो यह आप अपना एक शपर ले जैसे मैं अभी इरफान साहब ने ली है एक शपर मैं लगा यह देखिएगा और उसके बाद अपने अपने शूज रख के उसके बाद
इसको आप देखिएगा यह है यह हमने अपने शूज उतारे यह हमने इसमें बैग में रखेंगे और फिर उसे साथ लेकर जाएंगे तो यह जो पाकिस्तानी इबादत गुजार उन सब के लिए है कि भाई साहब मस्जिदों के सामने इस टाइप के लिफाफे रख ले ताकि वहां पर गंद ना पड़े तो
यह इन्होंने सिर्फ एक स्टैचू रखा हुआ है बुध का जिसके ऊपर इन्होंने चढ़ने के लिए स्टैचू के ऊपर भी इन्होने सामने इस टाइप के लफाफे रखे हुए हैं ताकि लोगों को सहूल हो सके सफाई रहे ये एक रूम है एंट्री रूम य तो उसके बाद यहां पर ये खड़े हो गए उसके
बाद य हमें आगे लेकर जाएंगे यहां पे एंट्री है तो अब हम दो खड़े हैं जी बंदे और उसके बाद और लोग आ रहे हैं तो फिर यह जब पूरा हो जाएगा तो फिर य आगे ट्रेवल करवाएंगे हम [संगीत] बुधा के डिफरेंट पोचर
है य बदा के कहते हैं सा स के करीब होते हैं पोचर मुख प बनाए और यह रिजनल है [संगीत] म्यूजियम बड़ा जबरदस्त है जी इसका और यहां से रूट स्टार्ट होता है बुधा का बहुत बड़ा फैन हूं और मैंने बहुत बुद्धा को ट्रैक किया है ववन नेपाल
के अंदर इंडिया के अंदर पाकिस्तान के अंदर बामियान अफगानिस्तान के अंदर फ त के अंदर चाइना के अंदर अब जापान के अंदर यह जो बुद्धा स्टैचू है उसके ऊपर चढ़ और फिर आपको वहां से शहर का नजारा करवाएंगे कि शहर कैसा लगता है बुधा के सर के ऊपर
से य जब ऊपर आ जाते हैं तो उसके बाद छोटी छोटी विंडोज बनाई उन्होने यह दिल से जहां फ्रॉम द हार्ट ऑफ बुद्धा यहां से आपको शहर के मुख्तलिफ मनाजर नजर आते हैं जब आप नीचे खड़े थे मजस मेंे के ऊपर तो आपको नजर आ रहे थे एक साइड से तीन होल
थ्री होल्स तो अब ये होल्स है जहां से आप नीचे देखते हैं एक होल ये है वो देखिए वो गेट है जहां से हम एंटर हुए थे जिसके अंदर हमने घंटा बजाया था दिखा देख रहे ये देखिए ये तस्वीर है तस्वीर के ऊपर एक निशान लगा हुआ है
यह बता रहा है कि यहां से आप नीचे देख रहे हैं दिल से तो हमने बुधा के दिल से दुनिया को देख रहे हैं हम इस वक्त तो वो नीचे गेट बड़ा छोटा सा नजर आ रहा है आपको यहां से यह उसके बाद यह सीढ़ियों से नीचे उतर रहे
हैं जी और यह अब पहले लिफ्ट से ऊपर आए और उसके बाद अब सीढ़ियों से नीचे उतरते चले जा रहे हैं तो बहुत ज्यादा सीढ़ लेकिन देखि सफाई इसलिए है कि यहां पर शूज अलाव नहीं है तो लोगों ने शूज जो अपने हाथों में उठा रखे
है तस्बी पूरी दुनिया में होती है हर मजहब के अंदर त तस्वी इनके य सेन इयर्स एक साइड से लेकर दूसरी साइड तक हर तरफ ऊपर से लेकर नीचे तक यह पूरा राउंड में और यह बेंच से है यहां पर बेंच निकाल के तो यह इबादत करने के लिए इनकी इबादत
करने का तरीका यही होता है कि किसी एक बुत के सामने खड़े होके तो यह अपने जो वर्स है वह पढ़ते हैं यहां पर इनका जो मेन पादरी या पंडित जो होता है का मौक जो बड़ा मौक कहलाता है वो यहां पे व सर्मन देता होगा डेफिनेटली
यह उसकी चेयर है तो यह इनकी इबादत का तरीका यह है कि यह लोगों की तरफ दे के सरमन नहीं देते यह सामने जो इनकी किताब पड़ी हुई है दूसरी साइड पे यानी इनका जो मौक होता है उसकी सिर्फ पीठ नजर आ रही होती है
यहां पर आपको ना कुछ बुत नजर आएंगे जिसके पीछे सूरज सूरज वाला मतलब यह होता है कि अब यह प्रॉपर बुधा बन चुका है तो यह वो पोचर है के जब बुधा बुधा बन चुका था तो अभ यह पीछे जो है वो सार ऐसे भी नजर आएंगे
आपको जिसके पीछे य नहीं होंगे तो यह मैक्सिमम मैं देख रहा हूं जिसके पीछे सूरज बना हुआ है तो इसका मतलब यह हुआ कि वो यह वो मजस में है जब बुधा बु बन चुका था ये उस चीज को जाहिर करते हैं अब ये सीढ़ियों से हम नीचे जा रहे हैं
तो इनका रिचुअल है कि आप लिफ्ट से ऊपर आते हैं और सीढ़ियों से नीचे जाते हैं ये लिया चरा मछलियों का और ये हम अब मछलियों को चरा डाले और उसके ऊपर लिखा हुआ है कि अगर आपकी आपको अच्छा लगता है तो आप 100 100 यानी
यहां पर रख जाए नहीं अच्छा लगता तो बगैर उसके लगाए मैं इंशाल्लाह बगैर उसके लगाऊ बड़ी बड़ी मछलिया है [संगीत] हम [संगीत] और ये ह न जो है मैं इनको वापस कर रहा हूं क्या याद करेंगे लेकिन पैसे इ के मे नहीं खुश हो गए क्या बात है [संगीत] कु
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Join us on an unforgettable journey as we explore the awe-inspiring Ushiku Daibutsu, Japan’s monumental symbol of peace and enlightenment. Standing at a towering height of 120 meters, this colossal Buddha statue captivates the soul with its serene presence and majestic beauty.
In this travel vlog, we embark on a pilgrimage to Ushiku Daibutsu, delving into its rich history and significance within Japanese culture. From the tranquil surroundings of the verdant countryside to the breathtaking views from the observation deck, every moment of our adventure is filled with wonder and reverence.
Follow along as we wander through the vast grounds of the Ushiku Daibutsu complex, marveling at the intricate details of this architectural marvel and reflecting on the profound spiritual essence it embodies. From the gentle sounds of prayer bells to the whispers of ancient wisdom echoing through the air, immerse yourself in the tranquility of this sacred site.
Whether you’re a seasoned traveler or a curious soul seeking solace, our journey to Ushiku Daibutsu promises to inspire and uplift, offering a glimpse into the timeless allure of Japan’s cultural heritage and the boundless depths of inner peace. Join us as we uncover the secrets of serenity amidst the towering presence of Ushiku Daibutsu.
4 Comments
Nice info
❤ tokyo
Yes javed sir, you are right peace loving religion blasted budha statue with bombs…violent character not in your mind.. It's in your blood
❤